فـهـرسـت مـطـالـب
صفحه
| فـصـل اول : کـلـیـات | 11 |
| 1ـ 1ـ مـقـدمـه | 12 |
| 2ـ 1ـ طـرح مسئـلـه | 14 |
| 3ـ 1ـ سئوالات تحقیق | 19 |
| 4ـ 1ـ اهـمـیـت و ضرورت تـحـقـیـق | 20 |
| 5ـ 1ـ اهداف تحقیق | 22 |
| 6ـ1ـ زمان پژوهش | 23 |
| 7ـ1ـ ابهامات و مشکلات تحقیق | 23 |
| 8ـ1ـ انگیزه تحقیق | 24 |
| 9ـ1ـ ابزار تحقیق | 24 |
| 10ـ 1ـ روش تـحـقـیـق | 24 |
| 1ـ 10ـ 1ـ تکنیک های تحقیق | 31 |
| 1ـ 1ـ 10ـ 1ـ مـشـاهـده | 31 |
| 2ـ 1ـ 10 ـ 1ـ مـصـاحـبـه | 32 |
| 3ـ 1ـ10 ـ 1ـ مـطـالـعـه اسـنـاد و مـدارک | 33 |
| 4ـ 1ـ10ـ 1ـ عـکـس | 33 |
| 11ـ 1ـ چـارچـوب نـظـری | 34 |
| 1ـ 11 ـ1 ـ نـظـریـه کارکردگـرایـی | 34 |
| 1ـ 11ـ1 ـ نـظـریـه نوآوری | 38 |
| 12ـ 1ـ پـیـشـیـنـه تحـقـیـق | 43 |
| 13ـ1ـ مفاهیم و اصطلاحات | 47 |
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| فـصـل دوم : میدان تحقیق | 51 |
| 1ـ 2ـ اسـتـان فـارس | 52 |
| 2ـ 2ـ شـهـرسـتـان مُهر | 55 |
| 1ـ2ـ 2ـ مـوقـعـیـت جـغـرافـیـایـی | 55 |
| 2ـ 2ـ 2ـ جـغـرافـیـای انـسـانـی | 58 |
| 1ـ2ـ2ـ2ـ تعداد و سیر تحول جمعیت طی چهار دوره سرشمـاری | 58 |
| 2ـ2ـ2ـ2ـ تـوزیـع جـمـعـیـت | 60 |
| 3ـ2ـ2ـ2ـ تـراکـم جـمـعـیـت | 63 |
| 4ـ2ـ2ـ2ـ وضـعـیـت سـواد | 63 |
| 5ـ2ـ2ـ2ـ تـرکـیـب سـنـی و جـنـسـی | 65 |
| 3ـ2ـ2ـ اقـتـصـادی و انـرژی | 65 |
| 3ـ2ـ عـشـایـر | 67 |
| 1ـ3ـ2ـ وضعیت موجود در جامعه عشایری براساس سرشماری1377 | 70 |
| 2ـ3ـ2ـ سـرشـمـاری عـشـایـر کـوچـنـده سال 1377 | 72 |
| 3ـ3ـ2ـ توزیع جمعیت6ساله وبیشترعشایری کشوربرحسب وضع سواد | 72 |
| 4ـ3ـ1ـ آمـار دام مـتـعـلـق بـه عـشـایـر | 72 |
| 5ـ3ـ2ـ اراضـی زراعـی مـتـعـلـق بـه عـشـایـر | 72 |
| 6ـ3ـ2ـ آمارجمعیتی عشایرداوطلب اسکان برحسب محل موردنظربرای اسکان | 73 |
| 7ـ3ـ2ـ آمار جمعیتی عشایر بر حسب علاقه به اسکان یا کوچ | 73 |
| 8ـ3ـ2ـ جـامـعـه مـورد مـطـالـعـه (روستای کریم آباد) | 75 |
| فـصـل سوم : فعالیتها و ویژگیهای اقـتـصادی عشایر مورد مطالعه قبل از اسکان | 84 |
| 1ـ 3ـ فعالیتهای اقتصادی | 84 |
| 1ـ 1ـ 3ـ صـنـایـع دسـتـی و فـرش بـافـی | 86 |
| 2ـ 1ـ 3ـ بـافـت سـیـاه چـادر | 91 |
| 3ـ 1ـ 3ـ تـولـیـد مـحـصـولـات مـخـتـلـف لـبـنـی | 92 |
| 4ـ1ـ3ـ فـعالـیتهایمـبتنی بـر نـگهـداری، پرورش، چـرا دامهـا | 94 |
| 2ـ3ـ ویـژگـیهـای فعالیت های شـغـلـی و اقـتـصـادی | 96 |
| 1ـ2ـ 3ـ اقـتـصـاد نـیـمـه خـود کـفـا و تـقـریـبـاً خـود کـفـا | 97 |
| 2ـ2ـ 3ـ اقـتـصـاد بـسـتـه مـعـیـشـتـی | 97 |
| 3ـ2ـ3ـ تـولـیـد بـرای مـصـرف | 98 |
| 4ـ2ـ 3ـ تکنـولوژی ابتدائی در تهیـه و ساخـت مـحـصـولات | 99 |
| 5ـ2ـ 3ـ نـوع مـعـیـشـت غـالـب مـبـتـنـی بـر دامـداری | 99 |
| 6ـ2ـ 3ـ زنـدگـی اقـتـصـادی پـر مـشـقـت | 99 |
| 7ـ2ـ 3ـ رابـطـه کـاری خـانـوادگـی | 99 |
| فـصـل چهارم : دلایـل و ریشه های اسـکـان | 101 |
| 1ـ4ـ خـلـع سـلاح و اسـکان عـشـایـر ایـران | 105 |
| 2ـ4ـ اصـلاحـات ارضـی | 108 |
| 3ـ4ـ مـلـی کـردن جـنـگل هـا و مـراتـع | 110 |
| 4ـ4ـ نـفـوذ سـاختـار شـهری | 111 |
| 5ـ 4ـ بسط نهاد های فرهنگی جدید | 112 |
| 6ـ4ـ عـدم تـوانـائـی مـالـی ، دسـت دادن دام هـا و فقر اقتصادی | 113 |
| 7ـ4ـ دلایـل شـخـصـی | 114 |
| فـصـل پنجم : تـحـولات عـشـایـر مورد مطالعه پـس از اسـکـان | 116 |
| 1ـ5ـ تغییر رفتارهای گروهی | 117 |
| 2ـ5ـ گسترش ارتباطات | 119 |
| 3ـ5ـ تغییر اشکال معیشتی | 120 |
| 4ـ5ـ روابط جدید با دستگاه های دولتی | 123 |
| 5ـ5ـ نیازهای جدید | 124 |
| 6ـ5ـ افزایش نرخ با سوادی | 125 |
| 1ـ 6ـ 5ـ بالا رفتن سطح آگاهی افراد | 127 |
| 2ـ 6ـ 5ـ تأثـیر بر پایـگاه اجتـماعی افـراد | 128 |
| 3ـ 6ـ 5 ـ مهاجرت | 128 |
| 4ـ 6ـ 5 ـ ایجاد هنجارهای اجتماعی و الگوهای رفتاری جدید | 129 |
| 5ـ 6ـ 5 ـ تحول در ملاک های ازدواج | 129 |
| 6ـ 6ـ 5 ـ شکاف میان دو نسل | 130 |
| فـصـل ششم: فعالیتها و ویژگیهای اقتصادی پس از اسکان عشایر روستای کریمآباد | 131 |
| 1ـ 6ـ فعالیتهای اقتصادی | 132 |
| 1ـ1ـ 6ـ دامـداری و فـعـالـیـت هـای وابـسـتـه | 132 |
| 2ـ1ـ6ـ صنایع دستی | 134 |
| 3ـ1ـ 6ـ بـاغـبـانـی | 136 |
| 4ـ1ـ 6ـ فـعـالـیـت در شـرکـت هـای صـنـعـتـی | 139 |
| 5ـ1ـ 6ـ پـرورش زنـبـور عـسـل | 140 |
| 6ـ1ـ 6ـ مـشـاغـل خـدمـاتـی | 142 |
| 7ـ1ـ 6ـ کـشـاورزی | 143 |
| 2ـ6ـ ویژگیهای اقتصادی | 144 |
| 1ـ2ـ6ـ خانواده به عنوان اصلی ترین واحد تولید | 144 |
| 2ـ2ـ6ـ گـسـتـرش خـانـوادههـای هـسـتـهای و مـسـتـقـل | 145 |
| 3ـ2ـ6ـ نوع معیشت غالب بر دامداری | 146 |
| فـصـل هفتم : تفاوت یکجانشینی عشایر با یکجانشینی روستایی در شهرستان مُهر | 147 |
| 1ـ7ـ کشاورزی | 148 |
| 1ـ نوع محصول تولید شده | 148 |
| 2ـ کشاورزی به عنوان یک شغل و فعالیت اقتصادی | 149 |
| 3ـ سابقه کشاورزی متفاوت | 149 |
| 2ـ7ـ دامـداری | 150 |
| 1ـ سـابـقـه دامـداری | 150 |
| 2ـ دامداری به عنوان شغل و فعالیت اصلی | 151 |
| 3ـ نوع دامها | 152 |
| 4ـ نوع تغذیه دامها | 153 |
| ـ نتیجهگیری | 155 |
| ـ فـهـرسـت مـنـابـع | 161 |
ـ فهرست عکسها
| شماره عکس | موضوع عکس | |
| عکس شماره (1) | کوچ عشایر قشقایی | 27 |
| عکس شماره (2) | چهره یک مرد قشقایی | 27 |
| عکس شماره (3) | زوج کهنسال عشایری در شهرستان مُهر | 28 |
| عکس شماره (4) | خانواده عشایری در زیر سیاه چادر | 29 |
| عکس شماره (5) | استفاده از چادرهای جدید در میان عشایر | 35 |
| عکس شماره (6) | سیاه چادر درمیان عشایرمنطقه به مانندگذشته کارایی چندانی ندارد | 36 |
| عکس شماره (7) | قبرستان تاریخی فال | 56 |
| عکس شماره (8) | آسیاب آبی خوزی | 56 |
| عکس شماره (9) | حمام وراوی | 57 |
| عکس شماره (10) | استودانهای خوزی | 57 |
| عکس شماره (11) | بخش انرژی شهرستان مُهر | 66 |
| عکس شماره (12) | پالایشگاه در حال ساخت | 67 |
| عکس شماره (13) | تابلو روستای کریمآباد | 75 |
| عکس شماره (14) | نمای کلی روستای کریمآباد | 78 |
| عکس شماره (15) | نمایی از یک خانه در روستای کریمآباد | 80 |
| عکس شماره (16) | نمایی از درون یک خانه در روستای کریمآباد | 82 |
| عکس شماره (17) | راهسازی به روستا | 82 |
| عکس شماره (18) | لولهکشی آب به روستا با سرمایه و هزینه روستائیان | 83 |
| عکسهای شماره
(19 و 20) |
درچند سال اخیر امکاناتی به روستائیان اختصاص یافته است که از آن جمله میتوان به برق و تلفن اشاره نمود | 83 |
| عکس شماره (21) | دامهای عشایری | 85 |
| عکس شماره (22) | طرح فرش عشایری و وسائل بافت آن | 87 |
| عکس شماره(23) | فرش عشایری | 88 |
| عکس شماره(24) | بافت جاجیم | 91 |
| عکس شماره (26) | سیاهچادرهای مورد استفاده در میان عشایر | 92 |
| عکس شماره(27) | تهیه کشک در میان عشایر روستای کریمآباد | 93 |
| عکس شماره(28) | زن عشایری در حال تهیه ماست | 94 |
| عکس شماره (29) | کودک عشایری در حال چرای دامها | 95 |
| عکس شماره(30) | چوپانان عشایری | 96 |
| عکس شماره (31) | دبستان ابتدایی در روستای کریم آباد | 127 |
| عکس شماره(32) | دامداری در روستای کریمآباد | 132 |
| عکس شماره(33) | دامداری امروزه به مانند گذشته در میان عشایر صورت نمیگیرید | 133 |
| عکس شماره(34) | به دست آوردن کره از شیر گوسفندان برای تغذیه | 134 |
| عکس شماره(35) | تمامی اعضاء خانواده در بافت فرش کمک میکنند | 135 |
| عکس شماره(36) | فرش یکی ازصنایع معمول در میان عشایر روستای کریمآباد | 136 |
| عکس شماره(37) | باغ مرکبات متعلق به روستائیان | 137 |
| عکس های شماره
(38 و39) |
اشتغال عدهای از عشایر روستای کریمآباد به عنوان باغبان در باغات | 138 |
| عکس شماره (40) | شروع به ساخت پالایشگاه گاز در شهرستان مُهر (پارسیان) | 140 |
| عکس شماره (41) | شروع به کار پالایشگاه گاز عسلویه (پارس جنوبی) | 140 |
| عکسهای شماره
(42 و 43) |
مشاغل جدید در میان عشایر اسکان یافته شهرستان مُهر (پرورش زنبور عسل) | 141 |
| عکس شماره(44) | رانندگی یکی از مشاغل جدید در میان عشایر روستا | 142 |
| عکس شماره(45) | زمینهای زیر کشت عشایر | 143 |
| عکس شماره(46) | دامداری در روستای کریمآباد | 151 |
| عکس شماره(47) | دامداری در خانه روستاهای شهرستان مُهر | 152 |
| عکس شماره(48) | محل نگهداری دامها در روستای کریمآباد | 154 |
ـ فهرست نقشه ها
| شماره نقشه | موضوع نقشه | |
| نقشه شماره (1) | نقشه ایران | 53 |
| نقشه شماره (2) | نقشه استان فارس | 59 |
| نقشه شماره (3) | نقشه شهرستان مُهر | 62 |
ـ فهرست جداول
| شماره جدول | موضوع جدول | |
| جدول شماره (1) | تعداد بخش ها ، شهرها و دهستان های کشور برحسب استان و شهرستان در پایان اسفند 1381 | 54 |
| جدول شماره (2) | ناحیه مورد مطالعه در سرشماری 1345 | 58 |
| جدول شماره (3) | ناحیه مورد مطالعه در سرشماری 1355 | 58 |
| جدول شماره (4) | ناحیه مورد مطالعه در سرشماری 1365 | 58 |
| جدول شماره (5) | ناحیه مورد مطالعه در سرشماری 1375 | 60 |
| جدول شماره (6) | ویژگی های جمعیتی شهرستان مُهر در سال 1380 | 60 |
| جدول شماره (7) | توزیع جمعیت بر حسب بخش به تفکیک جنس در سال1380 | 61 |
| جدول شماره (8) | توزیع جمعیت نقاط روستائی بر حسب بخش به تفکیک | 61 |
| جدول شماره (9)
|
توزیع جمعیت نقاط روستایی بر حسب بخش به تفکیک جنس در سال 1380 | 61 |
| جدول شماره (10) | تعداد آبادی های دارای سکنه شهرستانبر حسب بخش و به تفکیک تعداد خانوار | 61 |
| جدول شماره (11) | جمعیت و مساحت به تفکیک بخش در سال 1380 | 63 |
| جدول شماره (12)
|
درصد جمعیت 6 ـ 24 ساله در حال تحصیل بر حسبگروههای عمده سنی به تفکیک نقاط شهری و روستایی به صورت درصد | 64 |
| جدول شماره (13) | درصد باسوادان در جمعیت 6 ساله و بیشتر بر حسب گروه های سنی به تفکیک سن و جنس به درصد | |
| جدول شماره (14) | تخمین جمعیت عشایری در کتاب گنج شایگان | 69 |
| جدول شماره (15) | تخمین جمعیت عشایری در کتاب آشنایی با جامعه عشایری ایران | 70 |
| جدول شماره (16) | خانوار و جمعیت ایل ها و طایفههای مستقل بیش از 20 خانوار و استان های محل استقرار آنها | 71 |
| جدول شماره (17) | تـوزیـع جـمـعـیـت 6 سـالـه و بـیـشـتـر عـشـایـری کـشـور بـر حـسـب وضـع سـواد | 71 |
| جدول شماره (18) | آمـار دام مـتـعـلـق بـه عـشـایـر | 72 |
| جدول شماره (19) | اراضـی زراعـی مـتـعـلـق بـه عـشـایـر | 72 |
| جدول شماره (20)
|
آمـار جـمـعـیـتـی عـشـایـر داوطـلـب اسـکـان بـرحـسـب مـحـل مـورد نـظـر بـرای اسـکـان | 73 |
| جدول شماره (21) | آمـارجـمـعـیـتـی عـشـایـر بـرحـسـب عـلاقـه بـه اسـکان یـا کـوچ | 73
|
| جدول شماره (22)
|
جمعیت عشایری در استان های کشور به ترتیب تعداد خانوار ییلاقی و قشلاقی | 74 |
| جدول شماره (23) | ترکـیـب سـنـی و جـنسـی روسـتـای کـریـم آبـاد | 77 |
| جدول شماره (24) | فعالیت اقتصادی در میان عشایر کریم آباد | 81 |
| جدول شماره (25) | مقایسه خانوارهای کوچ رو ایل قشقایی در سال های 1353و1361 | 103 |
فـصـل اول
ـ مـقـدمـه
ـ طـرح مسئله
ـ سئولات تحقیق
ـ اهـمـیـت تـحـقـیـق
ـ اهداف تحقیق
ـ انگیزه تحقیق
ـ ابزار تحقیق
ـ جامعه مورد مطالعه
ـ مبهمات و مشکلات تحقیق
ـ زمان پژوهش
ـ روش تـحـقـیـق
ـ چـارچـوب نـظـری
ـ پـیـشـیـنـه تحـقـیـق
ـ مفاهیم و اصطلاحات
1ـ1ـ مـقـدمـه
تاریخ ایران در طول قریب 2500 سال و حتی بیشتر (قریب 2800 سال) و تا زمان سلسله پهلوی، همواره حکومت ایلات و قبایل بوده است. یک ایل، مثلاً قاجارها، روی کار میآمدند و پس از مدتی به دلایل مختلف از عرصه حکومت حذف می شد و جای خود را به ایل دیگر می دادند. این آمدن و رفتن ها پس از استقرار اسلام در میان مردم ایران نیز تداوم یافت تا به عصر پهلوی رسید.
در دوره پهلوی و در زمان حکومت رضاشاه بود که اولین سلسله حکومتی که پایه ایلی و قبیلهای نداشت در ایران روی کار آمد. با توجه به ساختار اجتماعی و سیاسی و قدرت رؤسای ایلات و قبایل ایران و نیز اینکه اغلب ایلات و عشایر ایران به خصوص در اواخر عصر قاجار مسلح بودند، رضا شاه همواره از قدرت ایلات و حرکت آنان نگران بود، تصمیم گرفت که به اسکان آنان اقدام نماید.
اسکان یک ایل، عشیره و یا یک قبیله به نوعی شکستن ساختار اجتماعی و خرد کردن بافت قدرت در آنان تلقی می شد و به این ترتیب دولت می توانست آسان تر بر ایلات و قبایل غلبه یافته و با سهولت بیشتری آنان را خلع سلاح نموده و آنان را در کل آسان تر در کنترل خود درآورد.
طرح اسکان عشایر که با شیوه زندگی آنها علیالاصول، مغایرت فراوانی داشت با مقاومت اغلب آنان مواجه گردید ولی دولت مرکزی به تدریج این مقاومتها را در هم شکست و کم و بیش بر قدرت عشایر فایق آمد.
پس از انقلاب اسلامی به رغم آنکه حدود 50 سال از اولین طرح های اسکان عشایر و مقامت ایلات و قبایل مختلف می گذشت و شرایط در این زمان بسیار تغییر کرده بود، دولت باز هم به دلایل مختلفی که بیشتر می توان به دلایل امنیتی و اقتصادی در آنها در اولویت باشد موضوع اسکان عشایر را در برنامه خود قرار داده که آخرین آنها نیز لایحه برنامه چهارم توسعه است که به آن اشاره و پرداخته شده است.
کوچندگی ظاهراً قدیمی ترین شیوه های زیست در ایران بوده است و به نظر می رسد در دورانی بسیار قدیم، قبایل کوچنده عشایری بیشتر جمعیت ایران را تشکیل می دادند. اما با توجه به کوچندگی و در حال کوچ بودن این جمعیت به صورت گسترده و دائم، تقریباً تخمین زدن آمار و ارقام مربوط به این جمعیت بسیار مشکل به نظر می رسد. با توجه به تغییر و تحولات اخیر در جامعه ایران و حتی با تاثیرپذیری از از تحولات جهانی، تعداد این عشایر کوچنده بسیار کاهش یافته است و امروزه به حدود 2% رسیده است.
با توجه به پتانسیل های موجود عشایر کشور در جهت تولید مواد مصرفی و صنایع مورد نیاز مردم و همچنین جاذبه های فرهنگی و مردم شناسی آنان، تاکنون این ظرفیت ها از سوی مسؤولان نادیده گرفته شده به گونه ای که عشایر در حال حاضر دارای مشکلات بی شماری هستند.
مطالعه و پژوهشهای اقتصادی در جوامع سنتی و عشایری که اساس اقتصادی آن بر پایه دامداری بوده است و امروزه با تغییراتی کشاورزی و سایر مشاغل در کنار آن قرار گرفته است، از جمله موضـوعات مهم در مردمشناسی است که این امر، باب جـدیدی را در مطالعه این جوامع، علاوه بر مردم شناسی ایلات و عشایر، گشوده است که آن مردمشناسی اقتصادی عشایر است که به تجدید نظر در برخی از مفاهیم اقتصادی در میان عشایر میپردازد. از جمله این مفاهیم میتوان به «اقتصاد تأمین بقاء» (طبیبی، 1371 :165) اشاره نمود. چنین اقتصاددانانی که از نظر وی این اصطلاح را به کار بردهاند در برخورد با پژوهشها و تحقیقهای انسانشناسانه به این امر واقف گشتهاند که نیازهای معنوی نیز در اقتصاد این جوامع بسیار تأثیرگذار هستند.
در مطالعه جوامع عشایری میتوان پیوستگی میان ارزش های اقتصادی را با سایر ارزشهای اجتماعی، سیاسی و فرهنگی را مشاهده نمود و از سویی دیگر نتایج اجتماعی، سیاسی و فرهنگی را در سیستم تولید و فعالیتهای اقتصادی مختلف مؤثر دانست.
یکی از مهمترین بحثهایی که در رابطه با عشایر می توان عنوان نمود بحث اسکان عشایر است. در گذشته در شهرستان مُهر تعداد عشایری که قشلاق خود را در این شهرستان میگذراندند بسیار فراوان بودهاند، اما امروزه فقط تعداد اندکی از این عشایر زمستانها را در این منطقه به سر میبرند و تعداد آنها سال به سال در حال کاهش است. در شکل وسیعتر آن، این مسأله در سایر نقاط نیز قابل مشاهده است.
در قرن نوزدهم جمعیت عشایری بین 25 تا 50 درصد از کل جمعیت ایران را تشکیل میداده است. این تعداد در اوائل قرن نوزدهم به 2/30 درصد از کل جمعیت ایران را شامل میشده است (صفینژاد، 1375 :41) تعداد کل عشایر ایران در سرشماری سال 1355 به 14 درصد میرسد. در آخرین سرشماری عشایر کوچنده کشور این آمار کمتر از 2 درصد بیان شده است (بلوکباشی، 1382 : 39) . این کاهش جمعیت عشایری ایران در این سالها را میتوان نتیجه مستقیم اسکان عشایر دانست. در تحقیق حاضر سعی بر آن است به جنبههای ویژهای از این اسکان در شهرستان مُهر در میان دستهای از عشایر قشقایی بپردازیم.
2ـ1ـ طـرح مـسـالـه
دربند «ی» ماده 30 برنامه چهارم توسعه اقتصادی، اجتماعی و فرهنگی اسکان عشایر به عنوان یکی از راهحلهایی که میتواند برای جمعیت عشایری سودمند و مفید واقع شود، مطرح گردیده است. در این بند اسکان عشایر به این صورت پیشنهاد شده است: «ساماندهی اسکان عشایر از نظر اقتصادی، معـیشتی و اشـتغال با حـفظ توانمندی های تولید مسکن، ایـجاد امـکانات زیر بنایی و خدمات رسانی به میزان حداقل پنجاه درصد (50%) از جمعیت عشایر». (مهاجر،1382)
در این بند چنین به نظر میآید که سیاست گام به گام و تدریجی اسکان عشایر به صورتی در نظر گرفته شده است که برای نیمی از آنها کارایی دارد و از این رو مسائلی مانند مسکن، خدمات عمومی و زیربنایی مد نظر واقع شده است. همچنین باید در نظر داشت که اینکه به جمعیت اسکان داده شده خدماتی داده شود یک امر است و اینکه اصولاً جمعیت عشایری را به اجبار اسکان دهند یک امر دیگر.
امـا اصـولیتریـن سـئوالاتـی که در رابـطه با ایـن مطلـب قابل بیان میباشـد به شـرح ذیل است:
· عشایر که علیالاصول کوچنده و دامپرور هستند، با اسکان و تغییر شیوه زندگیشان امکان تداوم زندگی دارند؟
· اصولاً اسکان و یکجانشینی بر تولید و زندگی این گروه تاثیر منفی نمیگذارد؟
· اینکه اساساً اسکان و یکجانشینی در کل به سود آنها بوده است و آنها از این امر راضی هستند یا نه؟
نکته دیگر اینکه طبق قانون نمی توان افراد به سکونت در جایی و یا عدم امکان اقامت مجبور ساخت (مگر در موارد استثنایی). در مورد این مطلب باید عنوان شود که در بین مسیر هایی که عشایر از آنها کوچ میکردند، معمولاً برخی از عشایر از مسیرهایی عبور میکردند که خسارات و آسیبهای فراوانی از سوی دامهای عشایری به مزارع و زمینهای کشاورزی اطرافشان وارد میآوردند که در بسیاری از موارد باعث نزاع و درگیری این کوچندگان و یکجانشینان آسیب دیده میشد.
حال باید پرسید که آیا عشایر اصولاً علاقه به اسکان دارند؟ به ویژه آنکه بسیاری از آنان سرزمینهای بسـیار وسیعی را از دسـت میدهنـد و به زندگی در زمـین کوچک محدود میشوند . لذا باید از آنها در مورد این مسأله تحقیق و بررسی شود و میزان رضایت آنان در مورد اسکان از خلال این گونه تحقیقات حاصل آید.
در این تحقیق سعی خواهد شد با شناخت زمینههای سنتی و تاثیرات تحولات جدید بر ساختهای سنتی، ساخت سیاسی، اقتصادی، اجتماعی، فرهنگی و . . . عشایر مورد بررسی واقع شود. همچنین آنچه در این جا حائز اهمیت جلوه میکند، میزان و نوع پذیرش این تحولات از سـوی این عشایر، طی این تحولات و نوآوریها و در طول زمان و روند اسکان آنان است.
همچنین برای بررسی بهتر سعی خواهد شد مقایسه ای میان اوضاع و احوال عشایر و ایلات در زمینه های مختلف صورت پذیرد و قواعـد[1] کلـی زندگی آنها قبل و بعد از اسکان مورد بررسی واقع شود. به دلیل آنکه کلیه جنبه های زندگی عشایـر، همراه با یکجانشـین شدن آنان دستخوش تغییر شده به گونـه ای، صورت های مختـلف زندگی آنها نیز متحول شد، شناخت این تغییر و تحولات می تواند ما را با زندگی و روند نوآوری، پیشـرفت و توسعه عشایر آشنا سازد. مهمترین مسأله ای که در اینجا می تواند مورد شناسایی واقع شود، میزان و نوع رابطه ای است که ایلات و عشایر با روستانشینان و شهرنشینان اطراف خود دارند. به دلیل متفاوت بودن فرهنگ زندگی و معیشت عشایر و ایلات با شهر نشینان و روستائیان، تلاقی و برخورد این دو فرهنگ و این دو دسته در نوع خود بسیار حایز اهمیت است، هرچند که ممکن است دیگر امروزه نتوانیم عشایر و ایلات یکجانشین را در فرهنگی خارج از فرهنگ روستایی جای دهیم، اما به دلیل متفاوت بودن پایه های اولیه و اساسی فرهنگی این اقوام و این دسته ها و آداب و رسوم و نوع معیشت و دیگر زمینه های اجتماعی، اقتصادی، فرهنگی و سیاسی این دو دسته، باز هم، تفاوت های عمیقی در سراسر زندگی آنان قابل مشاهده است، یکی از اساسی ترین مباحث تحقیق، پرداختن به این جنبه های مختلف زندگی عشایر و ایلات یکجانشین با روستاهای اطراف و نوع برخورد و تماس این دو دسته با یکدیگر خواهد بود که با این وجود بسیاری از ابهامات مختلف برای ما روشن خواهد شد.
در زندگی روزمره ما، آنچه که بیش از هر عامل دیگری در شکل دادن به جنبههای مختلف آن تاثیر دارد فرهنگ است. فرهنگ درون یک جامعه یک جریان تاریخی است که از نسلهای پیشین به ما رسیده است و جنبه تاریخی بودن آن کاملاً محرز است، زیرا دائماً در حال حرکت است و پیوسته در حال دگرگون ساختن خود ، اعضایش، محیطش و سایر فرهنگهایی که با آنها در ارتباط است از آنجا که چنین دگرگونی هایی باعث تغییرات در روابط اجتماعی بین انسان ها می گردند بررسی آنها امری ضروری است.
«همه جوامع در هر زمان و در هر حال در کشاکش نسبی تنش های مخصوص خود هستند هر جامعه را می توان به صورت صحنه رویارویی و تأثیرات متقابل دو نیرو فرض کرد. یکی نیرویی که مردم را به طرف تغییر می کشاند دیگری نیرویی که آنان را به حفظ وضع موجود وامی دارد نیروی اول تلاش می کند که برای استقرار خود توازن نیروی دوم را به هم بزند و دومی سعی دارد، تا اولی را از رسیدن به مقصود باز دارد. از آن جا که گرایش به تغییر، اصل بنیادین فرهنگ است همیشه نیروی نوآور با کنار زدن تدریجی یا سریع نیروهایی که حافظ وضع موجود هستند جایی برای خود باز می کنند و موجب تغییر می گردد» (فاستر، 1378: 45).
هم چنین «بررسی های انسان شناسی و جامعه شناسی حاکی از آن است که عوامل مختلفی چون اختراعات، اکتشافات، نوآوری های (مادی یا ایدئولوژیکی)، افزایش جمعیت، تحولات اکولوژیکی، جنگ، تماس فرهنگ ها و غیره همگی در تغییرات فرهنگی دخالت دارند، روی هم رفته عوامل تغییر و تحول یا داخلی اند یا از خارج سرچشمه گرفته و در نتیجه تماس بین جوامع به فرهنگ های دیگر راه می یابند اصولاً تجربه نشان داده است که جوامع دارای تکنولوژی پیشرفته، دیگر جوامع را تحت تأثیر قرار می دهند» (امان الهی، 1362: 103).
بنابراین می توان گفت انقلاب تکنولوژیکی جریانی است که از دو قرن پیش تاکنون، تغییرات عمیقی در جامعه غربی و در دنیا بوجود آورده است، جریان صنعتی شدن، رشد شهرنشینی، افزایش تولید و سرعت در وسایل ارتباطی و حمل و نقل و غیره، تنها تظاهرات خارجی یا پدیده های ظاهری انقلاب صنعتی محسوب می گردند و در حقیقت مجموعه حیات اجتـماعی و انسـانی از این انقـلاب مـتأثر گردیـده اسـت. زنـدگی خـانـوادگـی، زندگـی مذهـبی، ادبیات، هنر، پوشاک و غیره همه و همه عمیقاً و سریعاً در مدت زمان بسیار کوتاهی دستخوش دگرگونی قرار گرفته اند و امروزه نیز انقلاب تکنولوژیک ادامه دارد.
عشایر ایران از جمله اقشار مختلف ایران هستند که در چند دهه اخیر به دلایل فرهنگی، اقتصادی، اجتماعی و سیاسی گوناگون در میان آنها تغییرات و نوآوری های شدیدی در زمینههای مختلف به وقوع پیوسته است که زندگی آنان را دگرگون کرده است. با اشاعه نوآوری ها و ورود تکنولوژی های مدرن که پس از اجرای اصلاحات ارضی و وقوع انقلاب اسلامی رخ داد، از جمله گسترش وسایل ارتباط جمعی، ابزار و وسایل تکنولوژیکی، تأسیس مدارس نوین، احداث جاده ها، تأسیس ادارات دولتی و انتقال قدرت به دولت، تغییراتی عمده در حوزه های مختلف پدیدار گشته است .
تغییر و تحولاتی که در زندگی عشایر ایران به صورت کلی شکل گرفته است، همزمان با چندین عامل اساسی بوده است که برگرفته از دلایل سیاسی است که توسط حکومت ها رخ داده است. از مهمترین این دلایل به قدرت رسیدن رضاخان است که با طرح اسکان عشایر، تحولاتی را در رابطه با عشایر ایران به وجود آورد که این مسئله تنازعاتی را میان عشایر با دولت مرکزی شکل داده بود.
در زمان پهلوی دوم، هر چند که دوباره تا حدودی رؤسا و خوانین عشایر توانستند نظامهای ایلی را دوباره به وجود آورند، اما اصلاحات ارضی در این زمان در جنبههای متفاوتی تحولات عشایر را دامن می زد. اصلاحات ارضی به دلیل تغییر در تقسیم بندی زمینهای مالکان بزرگ که از خوانین شهرستان بودند، با زیر و رو کردن ساخت های سنتی همراه شد که همین امر تنازعاتی را برای خوانین، اربابان و مالکان عمده با دولت مرکزی به همراه داشت. روی هم رفته این تنازعات در زندگی عشایر تغییرات عمیقی را شکل داده بود. در آخرین مرحله نیز همزمان با انقلاب ایران در سال 1357 هجری خورشیدی تغییرات بی سابقهای در ایلات و عشایر ایران به وجود آمد که بیشتر این تحولات برخواسته از نیازهای عشایر نیز ادعاهای مسؤولین انقلاب در توجه به مناطق محروم بود.
3ـ1ـ پـرسـش هـای تـحـقـیـق
· آیا یکجانشین شدن عشایر منطقه به لحاظ اقتصادی به سود آنها بوده است؟
· چه تفاوت های اساسی در مشاغل و فعالیتهای اقتصادی عشایر منطقه در دو دوره قبل و بعد از اسکان صورت گرفته است؟
· پس از اسکان جامعه عشایری مورد مطالعه، چه تشابهاتی با یکجانشینان منطقه پیدا کرده است؟
· تغییرات اقتصادی چه تحولاتی در زندگی عشایر منطقه به وجود آورده است؟
4ـ1ـ اهـمـیـت و ضـرورت تـحـقـیـق
ضرورت و اهمیت هر پژوهش به نتایج و فوائد نظری و عملی آن برمی گردد یعنی از یک طرف به پیشرفت تفکر علمی و از طرف دیگر به شناخت واقعیتها مربوط می شود تا با توجه به شرایط خاص هر جامعه بتوان برنامه ها و طرح های مفیدی جهت بهبود و اصلاح آن برنامه ریزی و طراحی کرد.
بنابراین با توجه به این موارد بیان شده، نکات اساسی و حائز اهمیت در این بررسی به شرح زیر میباشد:
هر جامعه ای بر اساس شرایط منحصر به فردی که دارد، دارای ویژگیهای اجتماعی، اقتصادی، فرهنگی و . . . است که با سایر جوامع و محیطهای اطرافش جدا میشودکه همین تفاوتها به گونه ای هویت آن جامعه را در زمینه های مشخص شکل می دهد. به عبارتی دیگر، همین تفاوتهایی که در خصیصههای اقتصادی، اجتماعی، فرهنگی و. . . وجود دارد، هویت ویژه آن جامعه است. از آنجایی که در این مطالعه شناخت فعالیتهای اقتصادی جامعه مورد بررسی مد نظر ما است، مطالعه و شناخت هویت اقتصادی این جامعه میتواند رهنمودی مفید برای ما در این راه باشد. تفاوت در نوع معیشت در میان عشایر مورد مطالعه با دیگر جوامع اطراف خود، از این جملهاند. دامداری در میان عشایر همواره از اصلیترین راه های امرار معاش بوده است، در صورتی که دامداری به شکلی که در بین عشایر مورد مطالعه قابل مشاهده است، هیچگاه در میان یکجانشینان اطرافشان قابل رؤیت نیست.
در مورد اسکان ایلات و عشایر مختلف موجود در سطح کشور تاکنون تحقیقات مختلفی صورت گرفته است که اغلب به بررسی همین امور پرداخته اند. در این تحقیقات بیشتر به سطح رضایتمندی و پیامدهای مختلف اسکان از دیدگاه عشایر و ایلات اسکان یافته شده پرداختهاند که این امر تحولات و پیامد های اسکان را به جوامع مورد مطالعه که عشایر هستند و نیز به جامعه دانشگاهی انعکاس میدهد. از سویی دیگر چنین تحقیقاتی میتواند به مسئوولینی که در صدد کمک و تجهیز این دسته از عشایر هستند میتواند بسیار سودمند و مثمر ثمر واقع گردد و آنان را در این امر یاری رساند.
در چند دهه اخیر تغییر و تحولات فراوانی به به وقوع پیوسته است که در بسیاری از موارد موجب نوآوریهایی در ساختهای اقتصادی، اجتماعی، فرهنگی و سیاسی گردیده است و از سویی دیگر، زمینههایی در این ساخت ها موجب تغییر و دستخوش شده اند و جنبههایی نیز به کلی از بین رفتهاند و دیگر کارایی گذشته را ندارند. به عنوان نمونه، دامداری یکی از اساسیترین راه های امرار معاش در میان عشایر همواره به چشم میخورده است، اما امروزه به مانند گذشته چنین فعالیتهایی دیده نمیشود و تغییرات اساسی در این شکل و قالب کلی این فعالیتها رخ داده است و دامداری به صورت دامپروری درآمده است که در روستای کریمآباد به خـوبی قابـل مشـاهده اسـت. بـنابرایـن با توجه به به این تغییرات و از بین رفتن بسیاری از زمینههای اقتصادی در میان عشایر، باید به جمع آوری این میراث کـهن و در حال نابودی بپردازیم .
با چنین بررسیهایی میتوان از مشکلات و نابسامانیهای جوامع عشایری تا حدودی آگاه شویم و یا اینکه تغییرات به وجود آمده در آن جوامع را بهتر بشناسیم که در این میان یکی از جنبههایی که در آن چنین تغییراتی رخ داده است، فعالیتهای اقتصادی و معیشتی است. این شناخت و آگاهی میتواند زمینه را برای برنامه ریزی مؤثرتر در مورد عشایر فراهم آورد. همانگونه که میدانیم این گونه برنامه ریزیها باید با نیازها، ارزشها و هنجارهای جامعه مورد نظر منطبق باشد. در صورت انطباق است که چنین برنامه هایی مورد پذیرش و قبول این افراد واقع میشود. زندگی به صورت کوچندگی در گروههای مختلف از جمله ابتداییترین اشکال زندگی بشر در طول تاریخ بیان شده است و قدمتی چند هزار ساله دارد. جوامع کوچنده و گلهدار نوعی از جوامعیاند که با محیط زیست سازگاری دارند. در این گونه جوامع چهارپایان از اصلی ترین منابع امرار معاش محسوب میشوند و ابعاد گلهها، میزان قدرت آنان را نشان میدهد. گرایشی مردسالارانه در این جوامع دیده میشود که ناشی از ماهیت متحرک و پر جنب و جوش زندگی شبانی آنان است و علاوه بر آن فعالیت های عمده اقتصادی در میان این جوامع خصلتی مردانه دارد[1]. بنابراین این گروه های کوچنده، فرهنگ و سنت طولانی را به همراه خود به دنبال میکشند. از این توقف چنین حرکاتی در قالب اسکان در یک زمان به این فرهنگ چند هزار ساله خاتمه می دهد. بنابراین ثبت این گونه زندگی و استفاده از فرهنگ آنها برای اشکال بعدی زندگی آنان میتواند در شکلدهی آسانتر زندگی آینده آنان بسیار به کار آید.
5ـ1ـ اهـداف تـحـقـیـق
ـ هـدف کـلـی
ـ بررسی و مقایسه نوآوریهای شغلی در میان عشایر اسکان یافته شهرستان مُهر
ـ اهـداف جـزئی
ـ بررسی رابطه میان یکجانشینی با توسعه فعالیتهای شغلی در میان عشایر منطقه
ـ مقایسه دو دوره قبل از اسکان با دوره پس از اسکان به لحاظ فعالیتهای اقتصادی و شغلی در میان عشایر منطقه
ـ بررسی رابطه میان عشایر مورد مطالعه با روستاییان اطراف در ارتباط با تبادلات اقتصادی در دو دوره قبل و پس از اسکان در شهرستان مُهر
1ـ برای اطلاعات بیشتر ر ک به: نولان، پاتریک و گرهارد لنـسکی، 1380، جامـعه های انسانی، مقدمه ای بر جامعه شناسی کلان، ترجمه ناصر موفقیان، تهران، نشر نی
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نویسنده: مدیر سایت